केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन, आज दी गई अंतिम विदाई |

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रामविलास पासवान

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने गुरुवार को इस दुनिया को अलविदा कहे कर सबको छोड़ के चले गए। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। आपको बता दे कि रामविलास पासवान काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

उन्होंने अपना राजनीति में बहुत लंबा समय बिताया है। रामविलास पासवान वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी इन सभी प्रधानमंत्रियों के ‘कैबिनेट’ में अपनी जगह बनाने वाले शायद एकमात्र व्यक्ति थे। वह बड़े ही महेनति पूर्वक से काम किया करते थे।

उन्होंने बड़ी से बड़ी मिसाल कायम की है। राजनीति में जब रामविलास पासवान पहली बार 1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में राज नारायण और जेपी के प्रबल अनुयायी के रूप में लोकदल के महासचिव बने थे। वह सबके करीबी हुआ करते थे।

रामविलास पासवान ने एक छोटे से इलाके से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक का सफर अपने संघर्ष के साथ तय किया था।उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखना चाह। लगभग पांच दशक तक वो बिहार और देश की राजनीति में चमकते रहे और अब अपनी चमकान छोड़ सबको अलविदा कहे दिए।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोजपा नेता के निधन पर चिराग पासवान को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा, ‘मुझे आपके पिता के निधन के बारे में पता चला। केंद्र सरकार में रामविलास पासवान जी एक अहम दलित चेहरा रहे। 2004 में मैंने यूपीए सरकार का नेतृत्व किया था, जिसका पासवान जी हिस्सा थे, मेरे पास उस समय की बहुत सी यादें हैं। वे जननेता थे और उनकी बहुत प्रसिद्धि थी।

वे एक ऐसा नेता थे जो जिसके भी संपर्क में आते थे, वे उनसे प्यार और उनका सम्मान किया करते थे। उनके निधन से देश ने एक महान दलित नेता खो दिया है जो समाज के गरीब और दबे-कुचले वर्ग के लिए हमेशा खड़े रहे। मैं आपके और आपके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करता हूं। भगवान आपको ये असीम दुख सहने की क्षमता दे।’

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